धनतेरस का महत्व व कथा (ऑडियो सहित) | Dhanteras kab hai, Dhentaras ka mahatva aur katha

धनतेरस का महत्व व कथा Dhanteras ka mahatva katha dhanteras kab hai

धनतेरस का महत्व क्या है?

हमारे शास्त्रों में दीपावली को पर्वों का समूह माना गया है । दीपावली के साथ-साथ बहुत से त्यौहारों की शुरुआत होती है । उन्हीं में से एक धनतेरस को भी माना गया है । इस दिन समुद्र मंन्थन से भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश को लेकर प्रकट हुए थे । इसलिए इस तिथि को धनतेरस, धनत्रयोदशी या धनवंतरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है । भारत सरकार के द्वारा धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, कुबेर जी और माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है । धनतेरस व नरक चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यम की भी पूजा भी की जाती है । ऐसा माना है कि इन दिनों यम देवता की पूजा करने से एवं उनके निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है ।

धनतेरस कब है?

दिवाली का प्रारंभ धनतेरस से ही होता है । दीपावली से पहले धनतेरस का ही त्यौहार मनाया जाता है । धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन आता है । इस दिन आभूषण, वाहन, मकान आदि की खरीदारी करना शुभ माना जाता है । इसके बाद पर्वों के पुंज दीपावली की शुरुआत होती है । इन दिनों में भगवान धनवंतरी माँ लक्ष्मी जी के साथ भगवान गणपति जी की पूजा करते हैं ।

Also Read: गरम रोटी – ठण्डी रोटी ! hindi prerak kahani

धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

क्या आप ये जानते हैं धनतेरस का त्यौहार कबसे और क्यों मनाया जाता है । आईये जानते हैं – हमारे पुराणों के अनुसार जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था उस दौरान भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रगट हुए थे । जिस दिन वो समुद्र से प्रगटे वो दिन कार्तिक मास की त्रयोदशी अर्थात धनतेरस का ही था । इसीलिए हर साल इस दिन को धनवंतरी जयंती और धनतेरस के रूप में मनाया जाता है । भगवान धन्‍वंतरि को आयुर्वेद का जनक एवं चिकित्सा का देवता भी कहा जाता है । इस लिए हमारे भारत देश में इसे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मान्यता प्राप्त है ।

धनतेरस का पर्व धन और आरोग्य से जुड़ा हुआ है । इसलिए धन की प्राप्ती के लिए इस दिन भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है । निरोगी रहने व बिमारीयों से छुटकारा पाने के लिए धनतेरस को भगवान धनवन्तरि की पूजा करने से आरोग्यता की प्राप्ति होती है ।

धनतेरस पर क्या खरीदें?

धनतेरस खरीदारी के लिए भी महत्वपूर्ण दिन माना जाता है । धनतेरस पर आप श्री कुबेर यंत्र और श्री महालक्ष्मी यंत्र को अगर खरीदते हैं तो यह बहुत ही शुभ माना गया है । धनतेरस के दिन श्रीयंत्र को घर या दुकान की तिजोरी में रखने से पूरे साल पैसों में बरकत होती है । इसके अलावा धनतेरस पर लक्ष्मी, गणेश जी की मूर्ति खरीदना भी बहुत शुभ होता है । ऐसा संभव न हो तो लक्ष्‍मी, गणेश की फोटो वाला चांदी या सोने का सिक्‍का भी इस दिन खरीद सकते हैं ।

Also Read: समर्थ संत का प्रिय शिष्य (ऑडियो के साथ) | guru shishya katha in hindi with Audio

धनतेरस में कैसे पूजा करते हैं?

कैसे करें धनतेरस की पूजा आईये जानते हैं – धनतेरस पर शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धनवंतरि की स्थापना करें । इसी के साथ मां लक्ष्मी व गणेश की भी प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए । अब दीप प्रज्वलित करें और विधिवत पूजन करना आरंभ करें । तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि चीजें अर्पित करें । घर के दरवाजे की चौखट पर संध्या के समय चावल की दो ढेरी बनाकर दो दीपक अवश्य जलायें ऐसा करना बहुत ही शुभ माना गया है एवं इससे धनधान्य की वृद्धी, स्वास्थय में लाभ एवं घर में सुख शांति एवं बरकत होती है ।

धनतेरस पर किसकी पूजा करनी चाहिए?

धनतेरस पर खासतौर से मां लक्ष्मी जी, भगवान गणपति जी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है । अगर आपको घर में निरोगता, सुख संपन्नता और धन धान्य चाहिए तो धनतेरस के दिन इन देवों की पूजा एवं आरती अवश्य करें । साथ ही मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाएं ।

धनतेरस की पौराणिक कथा

धनतेरस की कहानी

धनतैरस की पौराणिक कथा इस प्रकार है । भगवान धनवंतरी के जन्म की कथा के सिवा, इसके बारे में एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है ।

कहा जाता है कि एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मी जी ने भी उनसे साथ चलने की जिद की । भगवान विष्णु जी ने कहा, कि यदि मैं जो कहूँगा वो मानो तो फिर मेरे साथ चल सकती हो । तब लक्ष्मी जी भी इस बात को स्वीकार कर लिया और भगवान विष्णु के साथ धरती पर आ गई । कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंचकर भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी को कहा,  जब तक मैं लौटकर न आऊं तब तक तुम यहीं ठहरना । मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम भूलकर भी उधर मत आना ।

अब लक्ष्मी जी तो ठहरी चंचला, वह एक स्थान पर कैसे टिक सकती थी । भगवान विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में हुआ, कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो प्रभु ने मुझे उधर आने से मना किया है । मुझे यहीं छोड भगवान स्वयं चले गए । लक्ष्मी जी से रहा नहीं गया और जैसे ही भगवान गये, वैसे ही लक्ष्मी भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं । कुछ ही आगे जाने पर उन्हें एक सरसों का हरा भरा खेत दिखाई दिया । जिसमें खूब फूल लगे हुए थे । सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं । आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मी जी गन्ने तोड़कर खा लिये ।

उसी क्षण भगवान विष्णु जी वहाँ आ गये और यह देखकर की लक्ष्मी जी ने उनकी आज्ञा का पालन नहीं किया । भगवान रुष्ट हो गये और नाराज होकर लक्ष्मी जी को शाप दे दिया, भगवान बोले – मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुमने मेरी बात न मानी और साथ ही किसान के खेत में चोरी का अपराध कर बैठीं । अब तुम इस अपराध के कारण 12 वर्ष तक इस किसान के यहाँ रहकर सेवा करो । ऐसा कहकर भगवान उन्हें वहीं छोड़कर क्षीरसागर चले गए । तब लक्ष्मी जी उस गरीब किसान के यहाँ रहने लगीं ।

Also Read: समझदार व्यापारी | samajhdar vayapri | hindi prerak kahani

उस किसान की दरीद्रता को देखकर माता लक्ष्मी को दया आ गयी । एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान करके रसोई बनाने से पहले इस देवी लक्ष्मी के स्वरूप का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तुम जो मांगोगी तुम्हें मिल जायेगा । किसान की पत्नी ने वैसा ही किया । पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया । लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया । किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से व्यतीत हो गए । फिर 12 वर्ष के बाद जब लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं । तो विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए । किसान ने भगवान के साथ उन्हें भेजने से इंकार कर दिया । तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है । यह तो चंचला हैं । कहीं नहीं ठहरतीं । इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके । इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारे यहाँ रूक सकी । तुम्हारे यहाँ इनका 12 वर्ष का सेवाकाल पूरा हो चुका है । किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा ।

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो । कल धनतेरस है । तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करो और रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल अर्थात शाम की संध्या के समय मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी । किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी । इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी । यह कहकर माता लक्ष्मी दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं । अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कहे अनुसार पूजा की । उस किसान का घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया । इसी वजह से हर वर्ष धनतेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा विशेष रूप से की जाती है । इससे माता घर में पूरे वर्ष स्थायी रूप से निवास करती है ।

धनतेरस के बाद क्या आता है?

दिवाली के पांच दिन त्यौहार के माने जाते हैं । जिसकी शुरुआत धनतेरस से ही होती है । छोटी दीपावली धनतेरस के अगले दिन मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है । कहते हैं नरक चतुर्दशी के दिन सुबह अभ्‍यंग स्‍नान (शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करना अभ्यंग स्नान कहा जाता है) ऐसे स्नान करने के बाद शाम को मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है और घर की चौखट पर दीपक जलाकर छोटी दीपावली अर्थात नरक चतुर्दशी मनाई जाती है । ऐसा करने से पूरे वर्ष अकाल मृत्यू से रक्षा होती है । सारांक्ष यह है कि धनतेरस का ये त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण है । इसे हमें बडी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए ।


Share to the World!

0 Comments

Submit a Comment

Your email address will not be published.

Subscribe Here

vedictale.com की हर नई कथाओं की notification पाने के लिए नीचे अपना नाम और इमेल डालकर सबस्क्राईब करें।

New Stories

संगठन की शक्ति (प्रेरणादायी कहानी) Sangathan Ki Shakti (prerak kahani)

संगठन की शक्ति (प्रेरणादायी कहानी) Sangathan Ki Shakti (prerak kahani)

इस कहानी से हमें प्रेरणा मिलती है की संगठन में बडा बल होता है । हमें सभी को संगठित रहना चाहिए । ये बात उस समय की है जब हमारे देश में ईंधन के लिए लकडी या उपलों का उपयोग किया जाता था… संगठन की शक्ति

read more
अनुभव का आदर | Anubhav Ka Aadar | Prerak Kahani in hindi

अनुभव का आदर | Anubhav Ka Aadar | Prerak Kahani in hindi

रात में तेज बारिश हुई थी । सुबह तो और भी अधिक चमचमाती धूप निकली । बकरी का बच्चा माँ का दूध भरपेट पीकर मस्त हो गया । फिर हरी घाँस को देखकर फुदकने लगा । गीली…

read more

Related Stories

error: Content is protected !! Please read here.